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हिमाचल में शतरंज की संभावनाएं-- हंस राज ठाकुर


विद्यार्थी के सर्वागीण विकास हेतु शिक्षा के साथ खेलें भी परमावश्यक हैं I हर खेल का अपना महत्त्व है व विद्यार्थी अपनी रूचि व कौशल के हिसाब से खेल का चयन करता है I वर्तमान स्कूली शिक्षा में लगभग सारे खेल विद्यार्थी के शारीरिक विकास के साथ जुड़े हैं – यहाँ बात करेंगे मानसिक संवर्धन से जुड़े खेल शतरंज की I 

'शतरंज एक ऐसा खेल – नहीं है कोई जिसका मेल'

विश्वनाथन आनंद का नाम कौन नहीं जानता- पांच बार का विश्व चैंपियन वो भी अलग अलग फॉर्मेट में I हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उन्होने शतरंज की खूबसूरती को पहचाना व देश के हर नागरिक के लिए इसे खेलना जरुरी बताया – उन्होने शतरंज को सौ दुखों के एक हल के रूप में परिभाषित किया I परिणामस्वरूप नयी शिक्षा नीति में भी शतरंज को तवज्जो मिली और हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने सौ दिन के एजेंडे में शतरंज, योग व संगीत को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने को मंजूरी दी I सौभाग्यवश, पिछले दो सालों में ही सरकार के इस मिशन को शिक्षा विभाग व प्रदेश के शतरंज प्रेमियों ने पहली से बाहरवीं कक्षा तक इसे स्कूली खेलों का अनिवार्य हिस्सा बना डाला I आज हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा राज्य बन गया है जहाँ खेलों के साथ इसे स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बनाया जा रहा है व इस दिशा में विकास के मामले में गुजरात , तमिलनाडु से अग्रणी नजर आ रहा है जो अपने आप में एक मिसाल  है I 

तत्कालीन शिक्षा सचिव हिमाचल सरकार ने दिसम्बर 2018 में संयुक्त निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा की अध्यक्षता में राज्य शिक्षा कौंसिल सोलन की सहभागिता से प्रदेश शतरंज पाठ्यक्रम समिति का गठन किया, जिसमे प्रदेश के शतरंज प्रेमी शिक्षक भी सदस्य हैं I शिक्षक व शतरंज प्रेमी सदस्यों के सहयोग से यह कार्य जल्दी संपन्न कर लिया गया व पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने व आगामी क्रियान्वयन हेतु राज्य शिक्षा कौंसिल सोलन के पास विचाराधीन है I सरकार के एजेंडे के अनुसार बहुत जल्द प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चैस क्लब भी देखने को मिल सकते हैं I 

शतरंज -मानसिक संवर्धन के साथ साथ विविधता का खेल है , जिसे प्रकृति भी बाधित नहीं कर सकती ,ऐसा खेल जिसे दस वर्ष का खिलाडी भी सौ वर्ष के खिलाडी के साथ खेल सकता है -जो किसी भी समय , किसी भी मौसम और किसी भी हालत में कहीं पर भी खेला जा सकता है वो भी बहुत कम खर्चे पर I वार्षिक स्कूली खेल प्रतियोगिता के दौरान बरसात में जहाँ सब मैदानी क्रीड़ायें बंद हो जाती हैं , शतरंज का खेल कमरों में भी निर्वधित जारी रहता है I सभी सरकारी विद्यालयों में माकूल खेल संसाधन भी उपलब्ध नहीं है I 

शतरंज के खेल में प्रदेश से अभी तक कोई भी खिलाडी चैस मास्टर ,फीडे मास्टर ,इंटरनेशनल मास्टर या ग्रैंड मास्टर नहीं बन पाया है क्योंकि इस छोटे से प्रदेश में सशक्त शतरंज संघ नहीं होने की वजह से ओपन स्पर्धाओं में भी कोचिंग संस्थान व प्रशिक्षण के अभाव में खिलाडी ज्यादा बेहतर नहीं कर पाए और आज तक विश्व शतरंज पटल पर कोई हिमाचली अपना रंग नहीं जमा पाया I 

पिछले दो सालों में डी.एम.सी.ए जैसे शतरंज संगठनों के चलते हिमाचल प्रदेश में शतरंज की बयार देखने को मिली है -प्रदेश सरकारी स्कूलों के बच्चों में इस खेल की बढती लोकप्रियता के साथ साथ आज लॉकडाउन जैसी परिस्थिति में जहाँ सब खेल बंद पड़े हैं , शतरंज निर्बाध रूप से ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के रूप में आयोजित की जा रही है I यहाँ तक की इस संकट काल में शतरंज खिलाडी इस ऑनलाइन खेल से कोरोना फाइटर की मदद हेतु प्रदेश में सहयोग राशी जुटा पाये हैं I इस खेल की क्षमता से सरकार भी वाकिफ़ है I प्रदेश के शतरंज प्रेमियों को यह भी इंतजार है कि इस बार से शतरंज को अनिवार्य रूप से 19 वर्ष से कम आयु वर्ग के खिलाडियों के लिए भी नियमित रूप से लागू किया जाये -पिछले वर्ष इस वर्ग के ट्रायल में प्रदेश के 11 जिलों से लगभग 100 खिलाडियों ने भाग लिया था I 

आज प्रदेश में शतरंज प्रतिभाएं उभर रहीं हैं और विश्व भर में हुए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि शतरंज खेलने वाले बच्चे अक्सर पढाई में भी अव्वल होते हैं I पिछले वर्ष , अप्रैल माह में मतदाता जागरूकता हेतु चुनाव आयोग की अनुमति से दो हिमाचली प्रतिभाओं हितेश आजाद व हँस राज ठाकुर ने चैस मैराथन का अनोखा विश्व कीर्तिमान बनाया I आज प्रदेश के गाँव गाँव तक स्कूलों के माध्यम से यह खेल लोकप्रिय बन रहा है जबकि योग व संगीत अभी तक दूर की कौड़ी नजर आ रहे हैं I सरकार को शतरंज के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करने के साथ प्रत्येक जिला स्तर पर खेल विभाग द्वारा संचालित चैस क्लब गठित करने होंगें ताकि उसमे जिला के हर आयु वर्ग के खिलाडी मिलकर युवाओं को इस खेल में और अधिक सशक्त बना सके – प्रदेश को इंटरनेशनल मास्टर स्तर के कोच भी जुटाने होंगे तभी इस नयी पौध को सही दिशा दे पाने में हम कामयाब होंगे I आज कोविड 19 के इस मुस्किल दौर में भी यदि सरकार व शिक्षा विभाग चाहे तो प्रदेश में स्कूली स्तर पर भी घर बैठे बच्चों की ऑनलाइन शतरंज प्रतियोगिताएं आयोजित करवायी जा सकती हैं I              

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