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अवधारणा या हकीकत – दोहरी पेंशन व्यवस्था -- हंस राज ठाकुर

एक आम अवधारणा है कि पेंशन बुढ़ापे का सहारा होती है I वर्तमान के साथ साथ , भविष्य की चिंता करना भी मानव का स्वभाव है I आज देश के लाखों कर्मचारी अपने व परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं I स्वभाविक भी है कि 30 -35 वर्षों तक सरकारी क्षेत्र में अपनी सेवा देने के पश्चात सेवानिवृति पर एक-दो हजार रुपए की पेंशन से परिवार व कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित नहीं हो सकता I वर्तमान में देश का हर कर्मचारी अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है – मुद्दा है पुरानी पेंशन बहाली का I 

सी.सी.एस पेंशन रूल-1972, जो 1 जून 1972 से नियमित व सरकारी कर्मचारियों पर लागु होते हैं उनमें संसोधन करके दिसम्बर 2003 से पहले नियुक्त कर्मचारियों तक सीमित कर दिया I कुछ राज्यों में 14 मई 2003 से पहले नियुक्त कर्मचारियों तक I जबकि रेलवे कर्मचारियों , दिहाड़ीदार कर्मचारी , सी.पी.एफ कर्मचारी, या अनुबंध कर्मचारी पर लागु नहीं होते I पेंशन 58 वर्ष की उम्र पर सेवानिवृत होने पर नियमित कर्मचारी को दी जाती है I कर्मचारी एक ही तरह की सेवा या पोस्ट में रहते हुए- दो पेंशन प्राप्त नहीं कर सकता है I दूसरी तरफ माननीयों को एक ही तरह की देश सेवा में दो -तीन बार भी पेंशन का प्रावधान है I कर्मचारियों को सेवाकाल के दौरान यदि किसी अपराधिक मामले में सलिप्त पाया जाये तो पेंशन रोक दी जाती है – दूसरी तरफ माननीयों के खिलाफ़ यदि अपराधिक मामले भी दर्ज होते हैं तो भी पेंशन धारा प्रवाह जारी रहती है I यह दोहरी पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को ठगा सा महसूस करवाती है, एक देश में दो तरह की व्यवस्था क्यों ? क्या कर्मचारी इस देश के नागरिक नहीं , यदि हाँ तो 2003 के बाद चुने गए माननीय इस नई पेंशन व्यवस्था में क्यों नहीं I ऐसे दोहरे मापदंड पेंशन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करते हैं I 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पुरानी पेंशन बहाली देश के हर कर्मचारी की मांग है और अपनी इस मांग पर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के अंतर्गत एकजुट हो खड़ा है I कई राज्यों में लॉकडाउन के चलते जहाँ अन्य गतिविधियाँ स्थगित हैं , नयी पेंशन स्कीम के कर्मचारियों द्वारा प्रधानमंत्री को पुराणी पेंशन बहाली बारे खून से पत्र लिखने की मुहिम जोर पकड़ने लगी है I 

एक जनवरी 2004 से देश में नई नेशनल पेंशन स्कीम लागु की गयी थी I इस तिथि के बाद केंद्र सरकार व राज्य सरकार में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था से बाहर कर दिया गया I हिमाचल सहित कई राज्यों में यह व्यवस्था केंद्र से भी पहले 14 मई 2003 को लागू कर दी गई I 

हाल ही में केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों के लिए राहत भरी ख़बर आयी कि 1 जनवरी 2004 से लेकर 28 अक्टूबर 2009 के बीच अपनी सर्विस बदली है अर्थात वे कर्मचारी जो इस अवधि के दौरान पुरानी सेवा छोड़कर किसी दुसरे विभाग में आ गए थे और इस वजह से वे पुरानी पेंशन व्यवस्था से बाहर हो गए थे , उन्हे पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल कर दिया गया I 

आज भी हज़ारों मामले न्यायलयों में लंबित हैं जो वर्ष 2003 से पूर्व सेवा में नियुक्त हुए थे और 14 मई 2003 के बाद नियमित हुए I वर्तमान परिदृश्य में देश का हर कर्मचारी पुरानी पेंशन से वंचित है और पुरानी पेंशन बहाली की यह मांग आज देश में व्यापक स्तर पर होने लगी है I कर्मचारी अपना पूरा जीवन देश सेवा में लगा देता है और बुढ़ापे में अपने आप को असहाय महसूस करने लगा है, नयी नेशनल पेंशन स्कीम में लगे अपने पैसे को भी सुरक्षित नहीं पा रहा है, उसका यह पैसा जोखिमों के अधीन है I 

केंद्र सरकार ने सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु पर उसे पुरानी पेंशन का प्रावधान भी किया है, मगर कई राज्यों में यह भी अभी तक लागु नहीं हो पाया है I कर्मचारी सरकार की विकास योजनाओं को धरातल पर फलीभूत करने वाला सहयोगी होता है I नई नेशनल पेंशन स्कीम के तहत वर्तमान में जरुरत के समय पर जमा की गयी अपनी सम्पूर्ण धनराशी को निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है I वर्तमान में कर्मचारियों के मूल वेतन व ग्रेड पे का 10% हिसा काटकर विभिन्न फण्ड मनेजरों के माध्यम से शेयर बाजार में लगाया जाता है I शेयर बाज़ार में लगाया यह करमचारियों का पैसा शेयर बाजार लुढकने के साथ ही लुढ़क जाता है , और कई बार तो मात्र 12 दिनों में कई एन.पी.एस खाता धारकों को 10000 से भी ज्यादा का आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ा है,क्योंकि शेयर बाजार जोखिमों के अधीन रहता है और कर्मचारी अपने पैसे व् बुढ़ापे की सुरक्षा चाहता है I

पेंशन प्रणाली में आर्थिक सुरक्षा सभी कर्मचारियों की मांग है और जायज भी नज़र आती है I केंद्र व् राज्य सरकारों को कर्मचारियों की इस मांग पर चिंतन व् मनन करना होगा , क्योंकि सरकार का हिसा भी, कर्मचारी के हिस्से के बराबर इस नयी पेंशन स्कीम में जाता है यदि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था लागु करती है तो जहाँ सरकार को अपना हिस्सा कर्मचारी को नहीं देना पड़ेगा ,वहीं कर्मचारी का पैसा भी सरकार के पास ही रहेगा , जो कर्मचारी की सेवानिवृति से पहले कई विकास योजनाओं में लगाया जा सकता है I दोहरी पेंशन व्यवस्था की कुंठा से भी कर्मचारी मुक्त हो पायेगा I सरकार के विकासात्मक कार्य भी और अधिक पकड पायेंगे I     

                    हंस राज ठाकुर गाँव व् डाकघर बग्गी जिला मंडी ( हि प्र )       

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