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सुरेश भारद्वाज

छात्र राजनीति से राजनीति में आये हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री एक सादर स्वभाव के व्यक्तित्व है। हिमाचल प्रदेश में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रहे आदरणीय सुरेश भारद्वाज का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ और उनका बचपन हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय वीरभद्र जी के प्रागण मे गुजरा। हिमाचल प्रदेश के सरकारी विद्यालय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छोटा शिमला से अपने शिक्षा की शुरुआत करने वाले और रोहड़ू के दूरदराज़ क्षेत्र  राजकीय उच्च पाठशाला पेखा में अपनी पढ़ाई करने वाले और  जब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घुमारवीं अपनी विज्ञान की पढ़ाई कर रहे थे तो उनका परिचय राष्ट्रीय स्वंसेवक  संघ से हुआ और बाद उन्होंने वह प्रचारक निकल गए। संगठन की रूप रेखा को बखूबी समझने वाले सुरेश जी को हिमाचल प्रदेश में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री का दायित्व दिया। उसके बाद सुरेश जी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में राष्ट्रीय महामंत्री के दायित्व को बखूबी निभाया और हिमाचल प्रदेश में जनता दल के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कलराज मिश्र जी थे तो सुरेश भारद्वाज जी को हिमाचल प्रदेश के युवा मोर्चा के अध्यक्ष के दायित्व दिया गया। देश की पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों और देश मे 1975 में थोपी गई आपातकाल के दौरान आदरणीय सुरेश भारद्वाज जी काफी समय तक भूमिगत रहे और बाद में जब उन्हें पकड़ लिया गया तो काफी समय तक जेल में रहे। कठोर कारावास की सजा दी। इनकी लग्न और कर्मठता को देखते हुए जब जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ तो इन्हें 1977 में  जनता युवा मोर्चा के प्रांत अध्यक्ष बना दिया। छात्र राजनीति से राजनीति में आने वाले भारद्वाज जी को शिमला बीजेपी मण्डल का 1988 में  अध्यक्ष  बनाया और साथ मे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का दायित्व दिया जिसमें देश के उपराष्ट्रपति आदरणीय वेंकैया नायडू जी उस समय अध्यक्ष थे। युवा मोर्चा अध्यक्ष रहते उन्हें 1990 में शिमला से भारतीय जनता पार्टी का टिकट दिया अरब37 वर्ष की उम्र में शिमला से सुरेश भारद्वाज 5800 मतों से जीतकर विधायक बने। परन्तु ढाई वर्ष तक विधायक रहने के बाद केंद्र की कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में बनी शांता कुमार की सरकार को बर्खास्त कर दिया और जब 1993 में दोबारा चुनाव हुए तो सुरेश भारद्वाज चुनाव हार गए।  प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके आदरणीय सुरेश भारद्वाज जी को 2002 से 2007 तक राज्यसभा के लिए मनोनीत किया और साथ ही जब देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी प्रदेश के प्रभारी थे तब उन्हें 2003 मे पार्टी के प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व दिया। राज्यसभा के सांसद रहते आदरणीय सुरेश जी chief whip यानी मुख्यसचेतक भी रहे।  प्रदेश के अध्यक्ष रहते उन्होंने संगठन की मजबूती के लिए दिन रात काम किया और उसके बाद वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय जय राम ठाकुर जी ने बीजेपी के अध्यक्ष का पद ग्रहण किया और हिमाचल में बीजेपी की सरकार बनाई। 2007 से लगातार  तीन बार  शिमला का प्रतिनितित्व करने वाले भारद्वाज जी दो बार लगातार पार्टी के मुख्यसचेतक यानी चीफ व्हिप भी रहे।
शिमला के विधायक माननीय सुरेश भारद्वाज जी को पहली बार मंत्री बनकर अपनी प्रतिभा को दिखाने का मौका सरकार में मिला वैसे विधायक रहते भी उन्होने अनेकों बार अपनी बुद्धि और तजुर्बे से विधानसभा व विधानसभा के बहार अपनी बात का लोहा मनवाया है।

हिमाचल प्रदेश के शिक्षामंत्री एक कुशल वक्ता के साथ साथ एक ईमानदार नेता के रूप में देश और प्रदेश में पहचाने जाते है। हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा विभाग शिक्षाविभाग का दायित्व आदरणीय सुरेश भारद्वाज जी को जो पद प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा आज नवाजा गया है वह उसके हकदार बहुत पहले से थे  परंतु राजनीति में सब जायज है ऐसा मेरा मानना है और जो उस पर खरा उतर जाए वो राजनीति का असली हीरा है।

हिमाचल प्रदेश में जब से नई सरकार आदरणीय जय राम जी के नेतृत्व में बनी है, हिमाचल के शिक्षा मंत्री प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में प्रयासरत है।
पिछले दो साल से लगातार हाल ही में मीडिया का सबसे बड़ा समूह इंडिया टुडे द्वारा हिमाचल को शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित कर इन्होंने अपने दृष्टिकोण की शुरूआत कर दी है। हिमाचल प्रदेश को शिक्षा में शिखर पर पहुचाने के लिए दिन रात काम कर रहे है।
देश के बड़े राज्यो को लगातार दूसरी बार पछाड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित होना हिमाचल के लिए गर्व की बात है।

इनके द्वारा शुरू की गई योजना  1.
1.
अखण्डशिक्षाज्योतिमेरेस्कूलसेनिकलेमोती# आने वाले कुछ वर्षों में हिमाचल के सरकारी विद्यालयों की दशा में परिवर्तन करेगा।
2.
अटल आदर्श आवासीय विद्या केंद्र हिमाचल के शिक्षा मंत्री का एक सपना है जिसे पूरा करने का स्कल्प इनकी कर्मठता को दर्शाता है।
3.
हिमाचल प्रदेश में संस्कृत को द्वितीय भाषा घोषित करना और दूसरी कक्षा से शुरू करना हिमाचल प्रदेश में एक नई पहल है
4.
पिछले दो सालों में हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने का काम हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री बखूबी से निभा रहे है। शिक्षा मंत्री ने दस हजार से ज्यादा नियुक्तियां दो वर्षों में कर दी है और 5000 से ज्यादा नियुक्तियां इस वर्ष होनी है।

5. आज हिमाचल प्रदेश के ज्यादा तर जिलो में कोई पद खाली नही है जिसका श्रय हिमाचल की सरकार को जाता है।
6. हिमाचल प्रदेश में भाषा लेब, विसुअल क्लासरूम जैसे फैसले लेकर नई शुरुआत की है।
7. हिमाचल प्रदेश के सरकारी विधायकों में काम करने वाले पीटीए, पैरा और SMC अध्यापको को वित्तीय लाभ देकर हजारों बिरोजगारो को आर्थिक लाभ देना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जिनका शोषण कांग्रेस सरकार पिछले 15 वर्षों से कर रही थी।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय जय राम ठाकुर जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले भारद्वाज जी को जो भी दायित्व हिमाचल के मुख्यमंत्री और संगठन ने दिया, उसके लिए सुरेश भारद्वाज ने दिन रात एक किया। मुझे याद है जब शिमला के कुसुम्पटी विधानसभा से सम्बंधित वार्ड सांगठी में पार्षद के उपचुनाव होने थे। यह चुनाव हिमाचल सरकार की पहली परीक्षा थी। दिन रात काम करने वाले भारद्वाज जी, जब कुछ नेता सिर्फ नजर लगाए बैठे थे भारद्वाज जी ने घर घर जाकर प्रचार किया और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन किया।
पच्छाद उप चुनाव में भारद्वाज जी को जो क्षेत्र चुनाव में दिया गया था उस क्षेत्र में कभी बीजेपी को लीड नही मिलती थी। राजगढ़ बाजार  बीजेपी के साथ लोकसभा में भी नही होता था। परन्तु भारद्वाज जी की सादगी और कठिन परिश्रम से भाजपा को पहली बार लीड मिली।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ हमेशा सच्चे सारथी  और सच्चे दोस्त की भूमिका में रहने वाले भारद्वाज जी हमेशा कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते है। आदरणीय जय राम ठाकुर जी के साथ लक्ष्मण और हनुमान की भूमिका निभाने वाले भारद्वाज जी एक कर्मठ कार्यकर्ता के साथ साथ कुशल राजनीतिज्ञ  और ईमानदार व्यक्ति है जो आज की राजनीति में बहुत कम देखने को मिलता है ।
डॉ मामराज पुंडीर की कलम से

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