क्या आपके बच्चे को के. जी .की वाकई जरूरत है ? सचिन ठाकुर

मुझे इस बात को बताने में कोई शर्म महसूस नहीं होती कि अपने अध्यापक साथियों से जब भी मैंने पूछा की उनके बच्चे क्या करते हैं तो उनका जवाब था की बच्चा के. जी. में है।।। जब मैंने उनसे पूछा की के. जी .का मतलब क्या है तो 80 % लोगो ने इनकार किया ,10 % लोगों ने फुल फॉर्म बताई की ये किंडर गार्डन है;बाकी 10 % किंडर गार्टन बता गए परन्तु ये है क्या इस बारे उनको कोई जानकारी नहीं थी।।।
आप भी पता लगा लीजिये।।।।90 % स्कूल जो के. जी. के नाम पर ओसतन 2000 ₹ प्रति माह की दर से आपका पैसा लूटते है उनको खुद नहीं पता की ये है क्या।।।।95 % लोग जो इन क्लासेज को पढ़ाते हैं उनको पता ही नहीं की ये है क्या???
आओ समझे कि के. जी. है क्या।।।
1840 इ में फ्रेडरिक फ्रोब्ल नामक के सज्जन ने बेड ब्लेंक्न बर्ग कस्बे में उन नवजात बच्चो जिनके माता पिता फैक्टरी में काम करते थे उनके लिए ,  दिन में चलने वाले स्कूल की स्थापना की।।। बच्चे  वहां दिन में खेलते ।।उसी दौरान नेचुरो चिकित्सा प्धत्ती का ये सिधांत प्रतिपादित हुआ की मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास 3 वर्ष की आयु से होना शुरू होता है। इस आयु से 6 वर्ष की आयु की तक के बच्चो को जितना एक्सपोजर हो  उतना ही बेहतरीन उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी।।। इसलिए आवश्यक है की बच्चे मिटटी में खेलें; घास में दौड़े ; कुओ का पानी पियें; खेतो खलिहानों में सैर करें; भारी मात्रा में कच्ची सब्जियां और फल खाएं।।। 
पहले जर्मनी और फिर फ्रांसि सी क्रांति ने शहरी कर्ण को बड़े पैमाने पर किया।।।। शहर बसे जरूर पर घरो का जमावड़ा इतना गहरा था की बच्चों के लिए खेलने की जगह ही नहीं बची।।। इसीलिए किंडर  गार्टन महत्व पूर्ण हो गये।।। बच्चों को शहर से बाहर खेतों और खलिहानों में खेलने के लिए भेजा जाता जहाँ वो सामूहिक रूप से खेलते; गाने गाते और सब्जियां और फल खाते।।। इसी से वो समाजिक बनावट भी सीखते और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी होता।।।।
अपने बच्चों के के. जी .को देखिये।।। ए फॉर एपल ; बी फॉर बैट से ज्यादा कुछ नहीं।।।। जिन दीवारों से मुक्ति दिलाने को के. जी. बनाया गया था , बच्चा उन्हीं दीवारों में कैद है।
फीस 2000 से 4000 ₹ ।।।
न पढ़ने वालो को कुछ पता न पढ़ाने वालो को ।
 माता पिता से पूछो तो जवाब एक ..."बच्चे का बेस स्ट्रोंग होना चाहिए...."
अगर आपका बच्चा मिटटी में खेलता है; घास पर घूमता है ; कुएं का पानी पीता है ,बाकी बच्चों के साथ खेलता है और दबा के सब्जी और फल खाता है तो बताइए सच में उसे के .जी .की आवश्यकता है क्या???
अब तो निजी शिक्षा की दुक्कानो ने लोवर के. जी .और अप्पर के .जी .भी शुरू कर दी हैं।।। इनका बस चले तो ये पेट में ही बच्चे को सिखाना शुरू कर दें।।।। आखिर बच्चे का बेस जो स्ट्रोंग करना है।।अगर अभिमन्यु उत्तरा के पेट में चक्रव्यूह समझ सकता है,तो आपका  बच्चा क्यूं नहीं।
याद रखिए किंडर गार टन का शाब्दिक अर्थ "बच्चों का बगीचा" जरूर है परन्तु इसका मूल अर्थ "बच्चा बगीचे में" है।
किसी शायर ने कहा है ...." छू लेने दे बच्चों के हाथो को चाँद सितारे; चार किताबें पढ़ के ये भी हम से हो जायेंगे...."
सचिन ठाकुर,
प्रवक्ता भौतिक शास्त्र,
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पालमपुर
की फेसबुक वॉल से साभार

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