बच्चों में रचनात्मकता गुणों को निखारना न की दबाना -- राजीव डोगरा

आज का आधुनिक दौर ऐसा है कि बच्चें पढ़ने लिखने में कितने भी तेज क्यों न हो मगर उनमें रचनात्मकता न के बराबर होती है क्योंकि उसको किताबी ज्ञान ज्यादा से ज्यादा दिया जाता है।मगर उसके अंदर जो गुण हैं उनको बहुत कम निखारा जाता है और बच्चे किताबी कीड़ा बन कर रह जाते है। माता-पिता और अध्यापक बच्चों की रचनात्मकता की तरफ बहुत ही कम ध्यान देते हैं। जिससे उनके अंदर जो गुण है।वह दबे के दबे ही रह जाते हैं और बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं जो बहुत कुछ करना चाहते हैं,सीखना चाहते हैं।मगर उनको सही दिशा न मिलने के कारण वह जीवन में पीछे रह जाते हैं।खेलना-कूदना,पढ़ना-लिखना जितना जरूरी है,उतना ही जरूरी है।बच्चों के अंदर रचनात्मकता को जगाना। भले वह कविता लिखने या कहानी या लेख या चित्रकारी करें या कुछ नया करना चाहते हैं।उनको उत्साहित करना हमारा कर्तव्य है भले हम माता पिता है या अध्यापकगण है। यह नहीं है कि अपनी मर्जी से ही हम उसको डांस क्लास या किसी म्यूजिक क्लास में भेज दे।हमें सबसे पहले देखना है कि बच्चे को किस चीज में ज्यादा रुचि है। हमें अपनी बच्चे की रुचि और रुझान को देखना परखना जरूरी है।अपने विचारों को अपनी ख़ुद की इच्छाओं को उस पर थोपना बिल्कुल भी गलत है। जब हम बच्चों की रूचियों को नजरअंदाज करते हैं,तो बच्चों की रचनात्मकता दबकर रह जाती हैं। जिसका सीधा-साधा नतीजा निकलता है कि बच्चे का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है क्योंकि बच्चे का जिस कार्य में रुझान और रुचि होती है वह उसी कार्य को दिल से करता है और जिस में बिल्कुल भी नहीं है वह कार्य उसकी मानसिक संतुलन को बिगाड़ देता है। मेरे कहने का तात्पर्य बस इतना ही है हमें बच्चों के रचनात्मक गुणों को उजागर करना है न कि उनको दबाना है और रचनात्मकता तभी आती है जब उनको उनकी रूचि के अनुसार डाला जाता है।मगर आप चाहते हैं कि आप का बच्चा आपके अनुसार करें तो आपको सर्वप्रथम उस कार्य के प्रति उसकी रुचि को जगाना होगा। क्योंकि जब बच्चों की किसी कार्य के प्रति रुचि जाग जाती है तो बड़े ही प्यार से और दिल से उस कार्य को करते है। हमारी सर्वप्रथम कोशिश नहीं होनी चाहिए ऐसी पहले हम बच्चों की रुचियों को जाने और उनकी रचनात्मकता उजागर करें। तो जो यह जीवन में सिर्फ किताबी कीड़ा बन कर न रहे।


राजीव डोगरा 
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
9876777233

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