बच्चों में धूम्रपान की समस्या और धूम्रपान निषेध दिवस विशेष

धूम्रपान की समस्या एक बहुत ही बड़ी समस्या है। इस समस्या से आज की नौजवान युवा पीढ़ी ही नहीं जूझ रही है।स्कूल में जाते बच्चे भी इस समस्या से ग्रसित है।छोटे-छोटे बच्चों द्वारा धूम्रपान करना कहां तक सही है ? और इस समस्या के लिए कौन दोषी है जहां तक मैं देखता हूं,इस समस्या के लिए उनके माता-पिता अत्यधिक दोषी हैं। क्योंकि माता पिता को अपने बच्चों की अच्छी और बुरी दोनों बातों पर निगरानी रखना अति आवश्यक है। पिछले कुछ सालों में भारत के साथ ही पूरे विश्व भर में धूम्रपान करने और उससे पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इस गंभीर लत ने कई लोगों को मौत का ग्रास तक बना दिया। धूम्रपान करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इसके कारण नौजवान पीढ़ी में फेफड़ों के खराब होने की समस्या अधिक हो रही है।धूम्रपान के धूएं में मौजूद निकोटीन, कार्बन मोनो आक्साइड जैसे पदार्थ हृदय, ग्रंथियों और धमनियों से संबंधित रोगों के कारण हैं। किसी भी प्रकार का धूम्रपान 90 प्रतिशत से अधिक फेफड़े के कैंसर, ब्रेन हेमरेज और पक्षाघात का प्रमुख कारण है। और लंबे समय तक धूम्रपान करने से मुंह, गर्भाशय, गुर्दे और पाचक ग्रंथि में कैंसर होने की अत्यधिक संभावना होती है।

हर साल  31 मई को  धूम्रपान  धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है। क्या मात्र धूम्रपान दिवस मनाने से धूम्रपान की समस्या खत्म हो जाएगी बिल्कुल भी नहीं। बच्चे वही सीखते हैं और उसी चीज की नकल करते हैं जो माता-पिता या उनके बड़े करते हैं। अगर आप चाहते हैं कि हमारे बच्चे को किसी प्रकार के नशे की लत ना लगे वह धूम्रपान जैसे ग्रस्त न हो  से पहले खुद को सुधारना होगा। क्योंकि बचपन ऐसा है और बच्चे ऐसेस  हैं कि वह देखा देखी वही कार्य करते हैं जो हमारे बड़े बूढ़े या फिर खुद हम करते हैं। धूम्रपान निषेधकरण तब ही सफल होगा जब घर पर माता-पिता और स्कूल और कॉलेजों मैं अध्यापक गण इस बुरी आदत का त्याग करें। आओ आज हम सब मिलकर संकल्प करते हैं कि हम धूम्रपान जैसी समस्या जो आज एक गंभीर बीमारी का रूप बन गई है उसका सदा के लिए त्याग कर देंगे और अपने आने वाली युवा पीढ़ी को एक स्वस्थ और उज्जवल जीवन प्रदान करेंगे


राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
पिन कोड 176029
9876777233

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