आखिरी शाम -- राजेश सारस्वत

 आँख खुलते ही निलांश की पहली नज़र उसके स्मार्ट फोन पर जाती थी। मम्मी फोन को कहीं दूसरी जगह रख दे तो निलांश की साँसे जैसे रुक ही जाती थी। एक शाम निलांश के पापा देर से घर पहुँचे तो देखा बेटा निलांश अपनी किताबों को बंद रखे हाथों में मोबाईल फोन के साथ खेल रहा था। उनको गुस्सा भी आया लेकिन अपने आप को रोककर निलांश से कहा कि तुम अभी तक सोए नहीं और ये मोबाइल फोन अभी तक हाथ में रखा हुआ है। निलांश निरुत्तर हो कर चुपचाप सो गया। निलांश के पिता का गुस्सा उसकी माँ पर उतरना संभव था। लेकिन माँ तो माँ होती है और माँ ने आराम से समझा बुझा कर मामला ठंडा कर दिया। सुबह फिर वही दिनचर्या....... निलांश ने आँख खुलते ही पहले अपने फोन को देखा डाटा ऑन के करके न जाने क्या करता था। अब उसका मन धीरे - धीरे पढ़ाई से हट गया था और घर पर कमरे में बंद दरवाजे पर कुंडी लगाकर पढ़ाई का बहाना बनाकर न जाने क्या करता था। उसके मम्मी - पापा को भी अब कुछ लगने लगा था कि निलांश इस मोबाइल फोन से कुछ न कुछ पढ़ाई से हटकर अन्य किसी काम में दस्तक दे चुका है। वो सोचते कि निलांश फेसबुक पर किसी से दोस्ती कर बैठा है या यूट्यूब पर कुछ विडियो देखता है। एक दिन इतवार को 11 उसके पापा ने जानबूझ कर उसको चायपति लाने दूकान पर भेज दिया और उसका मोबाइल खंगाल लिया उनको फेसबुक और उसके मोबाइल फोन पर किसी तरह का कोई प्रमाण और विडियो नहीं मिला । पिता का शक थोड़ा बहुत कम हुआ लेकिन कुछ फिर भी मन में अखर रहा था कि आखिर निलांश फोन पर इतना व्यस्त कहाँ होता है?बाज़ार से वापिस आने के बाद निलांश परेशान सा लग रहा था। दोपहर का खाना भी ठीक तरह से नहीं खा पाया। उस वक्त उसके पिता ने भी निलांश से कहा कि आज से वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेगा।  पढ़ाई की तरफ तुम्‍हारा कोई ध्यान नहीं है। बस इतना कहना था कि निलांश को गुस्सा आया और तपाक से अपने पापा को कहा-पापा! आपको मेरे मोबाइल फोन से इतनी दिक्कत क्यों है? आप अपने बेटे को वो सब नहीं देना चाहते जो बेटे को अच्छा लगता है। आखिर मुझे पैदा ही क्यों किया था जब मुझसे आपको इतनी प्रॉब्लम है? इतना सब सुनते ही निलांश के पापा स्तब्ध हो कर चुप हो गए और सोच में पड़ गए कि आज उनके जिगर के टुकड़े ने क्या कुछ कह दिया। वहाँ से उठकर निलांश अपने कमरे चला गया और दरवाजे में कुंडी लगा दी। उसके पापा भी हैरान हो कर आज गहरी सोच में पड़ गए और निलांश की माँ से अपने दुख को कहने लगे। धीरे धीरे उनको नींद पड़ गयी और सुबह उठकर निलांश की माँ जब उसके कमरे की तरफ गयी और दरवाजा खटखटाया लेकिन आज निलांश दरवाजा खोलने नहीं उठा। बार बार आवाज़ देने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई फिर निलांश की माँ डर गई और उसके पापा को आवाज़ देकर बुलाया दोनों ने दरवाज़े को खोलने की कोशिश की लेकिन नहीं खुला आखिर में दरवाज़ा तोड़ना पड़ा। जब अंदर जाकर देखा तो निलांश आज गले में फंदा लगाकर हमेशा के लिए गहरी नींद में सो गया था। उसका वही मोबाइल फोन जब देखा तो पाया कि वह अपने फोन पर कोई खेल खेलता था जिसकी वजह से आज उसने अपने प्राणों तक की आहुति दे दी। आज निलांश के मम्मी पापा को एहसास हुआ कि निलांश की फ़ोन देकर और उस पर ध्यान न रखने की वजह से निलांश ने अपना जीवन ही मोबाइल पर खेल खेलने के लिए तबाह कर दिया।                                                                   राजेश सारस्वत

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