नकल पर तीसरी आंख की नज़र -- जगदीश बाली

इस वर्ष हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड ने गंभीरता व सख्ती दिखाते हुए दसवी और बारहवी के सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना सुनिश्चित किया है। लिहाजा परीक्षा का माहौल काफी बदला सा लगेगा। दिलचस्प है कि पिछले वर्ष कैमरों के चलते कई स्कूलों का परीक्षा परिणाम काफी नीचे गिर गया था। अब हर केंद्र पर कैमरे होने से ज़ाहिर है परिणामों पर खासा असर पड़ेगा। महत्वपूर्ण होगा कि शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले कितने विद्यालय अपनी साख बनाए रखने में सफल हो पाते हैं।
 वर्तमान परिदृष्य को देखते हुए तीसरी आंख की तैनाती नकलचियों पर नकेल कसने में कारगर हो सकती है। बरहाल कैमरे लग जाने की खबर सुन कर नकलची परीक्षार्थियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी स्पष्ट दिखायी दे रहीं हैं। खास तौर पर मुक्त विद्यालयों के तहत परीक्षा देने वाले विद्यार्थि ये मालूम करने में लगे हैं कि उनके केंद्रों पर कैमरे लगें हैं या नहीं क्योंकि उनका पास या फ़ेल काफ़ी हद तक इसी बात पर आधारित है। 
 वास्तव में बहुत से केंद्रों पर बोर्ड की परीक्षाएं आम तौर पर बिना रोकटोक वाले वातावरण में होती है। कई केंद्र ऐसे होते हैं जहां बोर्ड का कोई उड़न दस्ता नहीं पहुंचता। दूर दराज़ के इका दुका केंद्रों पर ही यदा कदा थोड़ी बहुत रोकटोक से काम चलता है। मुक्त विद्यालय के परीक्षार्थियों के लिए कैमरे बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि इनमें ज़्यादातर ऐसे परीक्षार्थि होते है जो नियमित परीक्षाओं से मुड़ कर इस मुक्त परीक्षा में अपना भाग्य आज़माते हैं।
मैं ये नहीं कहता कि बोर्ड की परीक्षा ब्यवस्था बिल्कुल गल-सड़ चुकी है, परन्तु धीरे धीरे यह सड़न की ओर अग्रसर ज़रूर है। इस पर अंकुश लगाना ज़रूरी है। ऐसे में बोर्ड द्वारा कैमरे की आंख का सहारा लेना बहुत बड़ा कदम साबित हो सकता है।  शिक्षा बोर्ड की ये पहल कितनी सफ़ल होती है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि कितती शिद्दत और पुख्ता ढंग से इसे कार्यान्वित करता है। देखना है क्या शिक्षा बोर्ड कैमरों की की जांच करेगी या फ़िर क्या ये तीसरी आंख भी छलावा ही साबित होगी।

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