नशा -- राजेश सारस्वत

नशा एक ऐसी बीमारी जो न जाने कितनी बीमारियों की जड़ है। समाज में इस बीमारी ने इस तरह जगह बना ली है कि देश को संभालने की जिम्मेदारी लेने वाले आलाकमान भी इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की ज़हमत नहीं उठाते केवल मात्र विज्ञापनों के माध्यम से जागरूकता लाने ढोंग करते हैं और भाषणों के माध्यम से जनता तक संदेश पहुंचाते हैं कि नशा मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। मुक्ति का अभिप्राय यहां पर मौत से है। आम तौर पर जब किसी विवाह या किसी पार्टी में जाते हैं तो सात्विक भाव वाले व्यक्ति को कोई महत्व नहीं मिलता न ही तो  बिना शराब के विवाह की महता बताई जाती है। 
ये कैसी विडम्बना है कि जहां आज देश और दुनिया आर्थिक तंगी,सामाजिक असमानता, पर्यावरण प्रदूषण की समस्या, भूखमरी,आतंकवाद जैसी ज्वलंत समस्याओं की प्रभावित हैं वहीं पर इस नशीले पदार्थों का सेवन समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाने के लिए आवश्यक माना जाता है। वो चाहे देश प्रदेश के मुखिया हो, गाँव मुहल्ले के मुखिया हो, या साधारण मनुष्य हो इस नशा तंत्र में संलिप्त है। 
आए दिनों में नशाखोरी पर विद्यालयों में कॉलेज में इस विषय पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है लेकिन ये समायदार, ये आलाकमान न जाने इस बात से क्यों अनभिज्ञ है कि जब तक इन पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा दिया जाता है तब तक ये घातक बीमारी फेलती ही जाएगी। 

नशा घातक है तो इसकी उत्पादकता पर सरकार पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रही हैं,मात्र प्रतियोगिता करवाकर छात्र अपने ईनाम प्राप्त कर लेता है और फिर से उसी राह में चल पड़ता है जो उसके भविष्य को भयानक मौत की तरफ ले जा रही है। 

बीड़ी, सिगरेट, शराब, भंग, गांजा, कोकीन, हीरोइन, आजकल तो चीटा, और म्याउं-म्याऊँ न जाने क्या - क्या और कहाँ से ये सब आयात  हो रहा है इस पर कितनी गंभीरता से विचार किया जा रहा है ये सब महज़ दिखावा तो नहीं। हिमाचल प्रदेश में तंबाकू गुटखा पर बेन पिछले कई वर्षों से लगा हुआ है परन्तु फिर प्रदेश के प्रत्येक कोने में प्रत्येक दूकान में आज भी ये सब उपलब्ध होता है।इस जानकारी से पुलिस विभाग व आबकारी एवं कराधान विभाग भली भांति परिचित हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 

पिछले कुछ दिनों पहले सुनने में आया कि बच्चों के माता - पिता अब अपने बच्चों को बीड़ी सिगरेट पीने के लिए कह रहे हैं।शिमला क्षेत्र में पिछले महीनों इस चिटे से दो तीन बच्चों की खबर पड़ कर एक भय सा सबके मन में छा गया है न जाने हमारे बच्चे इस जानलेवा नशे की लत में न पड़ जाए इससे बेहतर तो यही है कि हमारा भविष्य हमारा बच्चा बीड़ी सिगरेट से संतुष्ट रहे तो हमारे बुढ़ापे का सहारा बने। 
इस बात से आज प्रत्येक आदमी अवगत है कि अगर इस देश के युवा को देशा के भविष्य को देश को खोखला होने से बचाना है तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब, के उत्पादन को प्रतिबंधित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और कोकीन, हीरोइन, चीटा जैसी घातक बीमारी को खत्म करने के लिए देश की सीमाओं को जहां से ये देश में दस्तख देता है आँखे खोल कर पहरा देने की आवश्यकता है। 
साथ ही साथ अपने आसपास के वातावरण को नशा मुक्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक व संगठन, राजनीतिक पार्टियों को जागना चाहिए अगर सच में देश के भविष्य की चिंता हो।
🙏राजेश सारस्वत 🙏शिमला हिमाचल प्रदेश

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