शिक्षा नीति में हो सुधार -- राजेश सारस्वत

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक व माध्यमिक स्तर तथा नवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई है। छात्रों को देखकर ये बिल्कुल भी आभास नहीं होता कि उनकी वार्षिक परीक्षा आरम्भ है सामान्य तौर पर जैसे छात्र पूरे वर्ष हंसी खुशी स्कूल आता जाता है बिल्कुल वैसे ही परीक्षा के दौर में भी चेहरे पर कोई शिकन या परीक्षा का भय नज़र नहीं आता। 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से पूर्व आमतौर पर देखा जाता था कि जब वार्षिक परीक्षा नज़दीक आती थी तो छात्र की चिंताएँ बढ़ने लग जाती थी और छात्र परीक्षा के लिए दिनरात मेहनत करना शुरू कर देते थे। आज समय और अधिकार के साथ - साथ सब बदलता नज़र आ रहा है। जहां एक ओर अध्यापक विभाग के आदेशों को पड़कर अपनी इंक्रीमेंट को बचाने के लिए लिए परेशान रहता है वहीँ पर छात्र फेल न होने की नीति की वज़ह से चिन्ता मुक्त होकर अपने अध्ययन से विमुख होता जा रहा है। जिन बच्चों के अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है या जो समाज में अपने बच्चों की मान मर्यादा की नींव बनाना चाहते हैं वो अपने बच्चों की पढ़ाई का पूरा - पूरा ध्यान रखते हैं परन्तु ऐसे अभिभावक विरले ही देखने को मिलते हैं।

 ज्यादातर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक कुंभकरण की गहरी नींद में सोए हुए हैं। जब उन्हें कहीँ से खबर मिलती है कि आपका बच्चा पढ़ाई से विमुख होकर अन्य बुरे कामों में दस्‍तख़त दे चुका है तब जाकर निंदा से उठने का प्रयास करते हैं और अध्यापक के पास जाकर बच्चों पास करने की विनती करते हैं। 

छात्र जान चुका है कि जहाँ कक्षा एक से लेकर कक्षा नौ तक का सफर बिना किसी पढ़ाई के हो गया है वहीं पर आगे भी ऐसे ही होता रहेगा। अध्यापक जहां पर बच्चों को पढ़ाई के लिए उत्साहित करने के लिए उन्हें ईनाम बांटते हैं वहीं पर अपनी नोकरी का रोना रोकर छात्रों को पढ़ने के लिए मज़बूर करने का प्रयास भी करते हैं। बच्चों को यह भी समझ आ गया है कि अगर उनको फेल किया गया तो अध्यापक की तनख्वाह में पैसों की कटोती होगी। 

इस बदलते कानून और बदलती शिक्षा में सब कुछ बदलता नज़र आ रहा है। ये बदलाव भविष्य में देश के लिए लाभकारी सिद्ध नहीं हो सकता। जिस शिक्षा पद्धति में शिक्षक को बांधकर और भयभीत कर शिक्षा देने के लिए, अच्छे परीक्षा परिणाम के लिए बाध्य किया जाए वो शिक्षा उन्नति नहीं विनाश का कारण बन सकती है। 

🙏राजेश सारस्वत 🙏

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