बढ़ते अपराध से देवभूमि हुई शर्मसार 

चोरी, हत्या, बलात्कार के कारण देवभूमि हिमाचल प्रदेश राक्षस वृति से युक्त हो गई है। पिछले कुछ वर्षों से समाचार पत्रों और न्यूज चैनल पर प्रसारित ख़बरों से प्रदेश में सेंकड़ों बलात्कार की घटनाएँ और हत्या के मामले सामने आए हैं। यह न केवल देवभूमि को शर्मसार करता है अपितु इंसान की सोच पर भी सवाल खड़ा करता है। महिलाओं के सम्मान की बातें सिर्फ किताबी और जुबानी सी लगती हैं। ऊना जिले में 7 वर्ष की गुड़िया के साथ बलात्कार की घटना ने इन्सानियत को शर्मसार किया है। बिलासपुर की फिजीयोथेरेपीस्ट ज्योति का परिवार आज की न्याय देखने के लिए इंतजार कर रहा है। कोटख़ाई की दिल दहला देने वाली घटना से कौन परिचित नहीं है। इन सभी मामलों के लिए जनता के आक्रोश के सामने सरकार को झुकना पड़ा लेकिन न्याय की सुई आज भी अटकी हुई है और दावे करने वाली सरकारों ने इन सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। बेटी है अनमोल, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे अभियान जमीनी स्तर पर मात्र जुमले नज़र आने लगे हैं। कोई भी अभियान तब तक बेईमानी है जब तक इसके मर्म को न समझा जाए। आधुनिकता का राग आलापने वाले ये भूल जाते हैं कि इस तरह की घटनाओं ने हमें आज आदिमानव की सदी में पीछे की ओर धकेल दिया है। जब तक समाज लड़कियों के प्रति अपनी सोच को नहीं बदलेगा तब इस तरह की घटनाओं को अंजाम मिलता रहेगा। वहशी दरिंदों को बचाने वाले न जाने उस वक्त अपनी बहन बेटियों को क्यों भूल जाते हैं। जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना बहुत बड़ी बात है परन्तु बड़ती घटनाओं की रोकथाम के लिए समाज को अपना नज़रिया बदलना होगा। आज भी महिलाओं के सम्मान में मात्र दिखावा ही नज़र आता है। महिलाओं के प्रति आवाज़ उठाने वाले भी बहुत सी वारदातों में संलिप्त पाए जाते हैं। महिलाएँ न केवल घर से बाहर सुरक्षित है अपितु चार दीवारी के अंदर भी जुल्म और अत्याचार की शिकार होती है। महिलाओं की क्षमता को पूरी देश दुनिया समझती है परन्तु अपने पुराने संस्कारों के कारण महिलाएँ अपनी आवाज़ की चार दीवारी के अंदर ही सीमित रखती है। समाज़ में हर वर्ग को प्रत्येक आदमी को अपना नज़रिया बदलना होगा तभी हम इस बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाने में सक्षम हो पाएँगे।युवा पीढ़ी को स्कूली शिक्षा में नैतिक मूल्यों की ओर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही साथ माता - पिता को अपने बच्चों के अंदर समाज में फैली बुराईयों को खत्म करने के लिए अच्छे संस्कार देने की जरूरत है क्योंकि परिवार के संस्कार स्कूली शिक्षा से कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं। मुंशी प्रेमचंद जी ने कहा है कि जो शिक्षा समाज में फैली बुराईयों को खत्म करने के लिए आवाज़ न उठाए, प्रयास न करें उस शिक्षा की जड़ बहुत कमजोर होती है इसलिए जड़ों को मज़बूत करने की आवश्यकता है। 
बेटी बहन है, बेटी माँ है, जीवनसाथी है,अनमोल है, बिन बेटी अस्तित्व नहीं मेरा। 

राजेश सारस्वत

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