स्कूलों में फंड की वसूली बंद

 हिमाचल सरकार की हरी झंडी के बाद स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों से किसी भी तरह का फंड नहीं वसूला जाएगा। छात्रों से फंड न वसूलने का प्रस्ताव बीते तीन साल से सरकार के विचाराधीन था। इसे मंजूरी देकर सरकार ने एलिमेंटरी स्कूलों में पंजीकृत सात लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत प्रदान की है। सरकार के पत्र संख्या ईडीएन-सी-ए(3)-6/2011 के अनुसार अब कोई भी सरकारी व सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल छात्रों से किसी भी तरह का फंड नहीं वसूलेगा। शिक्षा विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर व ब्लाक एलिमेंटरी आफिसर को निर्देश दिए हैं कि स्कूल मुखियाओं को सूचित करके छात्रों से फंड वसूली पर तुरंत रोक लगा दी जाए। वर्तमान में छठीं से आठवीं कक्षा के प्रत्येक छात्रों से यूनियन फंड के तीन रुपए, बिल्डिंग फंड के पांच रुपए, स्कॉउट एंड गाइड फंड, स्पोर्ट्स फंड व साइंस फंड के एक-एक रुपए मासिक वसूले जा रहे हैं। इसी तरह पहलीं से पांचवीं कक्षा के छात्रों से बिल्डिंग फंड व स्पोर्ट्स फंड का एक-एक रुपया तथा रेडक्रास फंड के 10 पैसे व मिसलिनियस फंड के 40 पैसे कुल 2.50 रुपए प्रत्येक  माह वसूले जाते हैं, यानी अप्पर प्राइमरी के छात्रों से सालाना 132 रुपए तथा प्राइमरी के विद्यार्थियों से 30 रुपए सालाना फंड के रूप में लिए जाते हैं। राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2) के प्रावधान को मंजूरी देने के बाद तत्काल फंड वसूली पर रोक लगा दी गई है,क्योंकि आरटीई अधिनियम में किसी भी तरह का फंड छात्रों से न लेने का प्रावधान है। बताते चले कि राज्य में छात्रों से फीस वसूली तीन साल पहले ही बंद कर दी गई है, लेकिन फंड वसूली का मामला पूर्व सरकार के कार्यकाल से विचाराधीन था। विभाग ने साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल छात्रों से फंड वसूलते पाया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जाएगी। सरकार के इस फैसले से मुख्यतः निर्धन पृष्ठभूमि से जुड़े छात्रों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि सरकारी स्कूलों में अधिकतर बच्चे निर्धन परिवारों के पंजीकृत हैं।
साभार :दिव्य हिमाचल

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