सशक्त ग्राम पंचायत से निकलेगी विकास की राह-- मदन हिमाचली, सोलन

भारतीय संस्कृति में सभा समितियों का विशेष योगदान रहा है। विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में भी सभा एवं समितियों का उल्लेख मिलता है, जिनका न केवल परिवेश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान रहता था, अपितु न्याय प्रक्रिया पूर्ण करने में भी अहम भागीदारी रहती थी और यह कहावत भी चरितार्थ होती थी कि पंचों में परमेश्वर बसते हैं। तत्कालीन समाज में जिसे धर्म आसन दिया जाता था वह ईश्वर को साक्षी मानकर सही न्याय देने हेतु कटिबद्ध होता था। कालांतर वही स्थान ग्राम पंचायतों ने लिया, जिसे वर्तमान में हम ग्रामीण विकास की प्रथम इकाई के रूप में भी जानते हैं। स्वातंत्र्योत्तर भारत में पंचायती राज प्रणाली को दृढ़ करने में भारत सरकार, प्रदेश सरकारों तथा जिला प्रशासनों का विशेष योगदान रहा है और यदि 1947 से लेकर वर्तमान तक के विकास पर नजर दौडाएं तो ज्ञात होता है कि ग्रामीण एवं शहरी विकास में ग्राम पंचायतों एवं नगर पंचायतों का विशेष योगदान रहा है। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण आंचल में यद्यपि ग्राम पंचायतों, खंड विकास समितियों तथा जिला विकास समितियों के माध्यम से विकास हुआ है, परंतु इन 65 वर्षों में जितना विकास होना चाहिए था, उतना नहीं हो पाया। इसका प्रमुख कारण जहां योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु आर्थिक अभाव रहा है, वहीं निरक्षरता भी प्रमुख कारण है, क्योंकि पंचायत पदाधिकारियों का चयन होता रहा, लेकिन उन्हें योजनाओं की जानकारी न होने के कारण वे विकास की गति को आगे नहीं बढ़ा पाए। जबकि भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना से पंचायती राज के माध्यम से पूर्ण होने वाली 90 योजनाएं पंचायत पदाधिकारियों की राह देखती रहीं। ऐसे भी पंचायत पदाधिकारियों का चयन होता रहा, जो सरकार एवं जिला प्रशासन का ग्रामीण विकास की ओर रुख नहीं मोड़ पाए। मात्र पद पर आसीन होकर ही पंचायत पदाधिकारी संतुष्ट दिखाई दिए। वर्तमान विकास प्रणाली पर यदि नजर दौड़ाएं तो भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास हेतु इतनी योजनाएं हैं, जिन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है और ग्रामीण विकास योजनाओं के उद्देश्य से  करोड़ों रुपए वर्ष के अंत में लैप्स हो जाते हैं। इसका कारण यह है कि योजनाओं को लागू कराने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है या तो वह पर्याप्त शिक्षित नहीं हैं अथवा भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। आमजन के कल्याण के लिए आया धन यदि भ्रष्टाचार रहित होकर उनके ही कल्याण में लगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की कोई दूर की कौड़ी नहीं होगी। भारत सरकार की विभिन्न ऐसी योजनाएं जैसे ग्रामीण कुटीर, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, इंदिरा आवास योजना, नाबार्ड, खादी, ग्रामोद्योग, वानिकी, दुग्ध, पशुपालन, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क, एससी- एसटी विभाग, पंचायती राज विभाग की विभिन्न ऐसी योजनाएं हैं, जिससे विकास को नए आयाम दिए जा सकते हैं। वर्तमान में निर्मल भारत, मनरेगा, सिंचाई जनस्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाएं इसके अलावा विधायक निधि, सांसद निधि इत्यादि ग्रामीण एवं शहरी विकास में बहुमूल्य योगदान देते हैं। हिमाचल जो कि 55673 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है तथा 68 लाख 56 हजार 509 से अधिक की आबादी को अपने आंचल में समेटे है। यहां पर 3243 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। पंचायतों के सभी पदाधिकारीगण यदि समर्पण की भावना से कार्य करते हैं तो विकास की गति को तीव्रता मिलेगी। कुछ ऐसी भी योजनाएं हैं जो समतल एवं पहाड़ी क्षेत्र के लिए एक जैसी हैं, जबकि इनके कार्यान्वयन हेतु अलग से मापदंड निर्धारित किए जाने चाहिए। ग्राम पंचायतों का नेतृत्व करने के लिए पढ़े-लिखे एवं समर्पित पंचायत पदाधिकारी ही चुने जाने चाहिए। तभी ग्राम पंचायतों एवं नगर पंचायतों का विकास संभव है। ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी को दृढ़तापूर्वक अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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