बदलते मौसम पर मंथन करेंगे देश के वैज्ञानिक

विश्वभर में तेजी से हो रही ग्लोबल वार्मिग के कारण मौसम में आ रहे बदलाव और इसके असर को लेकर देशभर के मौसम विज्ञानी सोलन में मंथन करने के लिए जुट रहे हैं। इसके लिए 24-25 फरवरी को सोलन के बड़ोग में विचार गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के नामी मौसम, पर्यावरण, कृषि एवं भू वैज्ञानिक भाग लेंगे। इसका विषय सुनियोजित कृषि द्वारा बदलते मौसम का प्रभाव कम करना है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते मौसम से देश के प्रत्येक क्षेत्र में कृषि की पद्धति और फसल चक्र गड़बड़ा रहा है। ऐसे में गोष्ठी के माध्यम से प्रयास किया जा रहा है कि किसान बदलते मौसम के हिसाब से ही कृषि करें और उन्हें इसकी चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए।
गोष्ठी का आयोजन डॉ. वाइएस परमार विश्वविद्यालय नौणी के मृदा विज्ञान के सुनियोजित कृषि विकास केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इसमें भारत सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त सचिव, बागवानी कमिश्नर, एनसीपीएएच नई दिल्ली के संयुक्त सचिव सहित नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य वैज्ञानिक भाग लेंगे। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. रणजीत सिंह सिपहिया ने बताया कि इस विचार गोष्ठी में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-काश्मीर व देश के उत्तरी-पूर्वी राज्यों में हो रहे मौसम बदलाव का डाटा एकत्र किया जाएगा। इसके बाद पूरे सत्र के दौरान वैज्ञानिकों की सिफारिशों के अनुरूप विस्तृत योजनाएं बनाई जाएंगी। इसमें देश के किसानों-बागवानों को भी जोड़ा जाएगा और मौसम के अनुसार उनकी फसलों के लिए प्रारूप तैयार किया जाएगा। इस गोष्ठी में वैज्ञानिकों के अलावा क्षेत्र में पर्यावरण पर कार्य कर रही गैर सरकारी संस्थाओं, प्रगतिशील किसानों व अन्य बुद्धिजीवियों को भी बुलाया गया है। वैज्ञानिक मत है कि वर्षा, तापमान वृद्धि और ज्यादा बर्फबारी के प्रभाव का मुकाबला सुनियोजित कृषि से ही किया जा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर हिमालयी राज्यों को ध्यान में रखकर यह गोष्ठी की जा रही है ताकि यहां पर कृषि व बागवानी क्षेत्र में ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव को कम किया जा सके।
source:jagran

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