कालेज लेक्चरर्ज भी करवाएंगे पीएचडी

कालेज लेक्चरर्ज भी करवाएंगे पीएचडी

हिमाचल प्रदेश के कालेजों में कार्यरत प्रवक्ता भी अब पीएचडी के गाइड बन सकेंगे। पिछले मंगलवार को आयोजित कार्यकारिणी परिषद (ईसी)ने इस निर्णय को अपनी मंजूरी दे दी है। कालेजों के वही शिक्षक पीएचडी के लिए गाइड बन पाएंगे, जो एमफिल व पीएचडी हैं। इसके अलावा उनका अध्यापन अनुभव कम से कम 12 वर्ष का होना चाहिए। कालेजों में अनुबंध आधार पर कार्यरत शिक्षक पीएचडी गाइड नहीं बन पाएंगे। विवि प्रशासन इस नियम को इसी वर्ष से लागू करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक गाइड बनाने की अनुमति देने से पहले इसको लेकर नियम बनाए जाएंगे। राज्य के कालेजों में प्रवक्ताओं के 2100 पद सृजित हैं। मौजूदा समय में 1800 के करीब शिक्षक ही तैनात हैं, बाकी सीटें खाली पड़ी हुई हैं। इनमें 600 शिक्षक अनुबंध आधार पर तैनात हैं। 500 के करीब कालेज प्रवक्ता गाइड बनने के लिए योग्य बताए जा रहे हैं। प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला छात्रहितों को देखते हुए लिया है। विवि में शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों को पीएचडी के लिए गाइड नहीं मिल पा रहे हैं। जिन छात्रों ने जेआरएफ क्लीयर किया है उसे उस का लाभ पीएचडी में एन्रोलमेंट के बाद ही मिलता है, मगर विवि में सीटें खाली न होने के चलते कई मर्तबा छात्रों को दाखिला ही नहीं मिल पाता। ऐसे में उनकी जेआरएफ की समय अवधि भी समाप्त हो जाती है। अब कालेज में ही गाइड मिलने से उन्हें यह सुविधा मिल सकेगी। अभी तक अंग्रेजी, ज्योग्राफी व राजनीतिक शास्त्र विषय में कालेजों के प्रोफेसरों को गाइड बनने की व्यवस्था थी। कुछ समय पहले भी प्रशासन ने यह नियम लागू किया था, मगर बाद में शोध गुणवत्ता को देखते हुए वापस ले लिया था।

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