हिमाचल में शत-प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे


 हिमाचल देश का ऐसा राज्य बन गया हैं, जहां शत-प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे हैं। शिक्षा से जुड़ी प्रथमसंस्था की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में छह से 14 आयु वर्ग के 99.7 फीसदी बच्चे स्कूलों में भर्ती हैं। बाकी के 0.3 फीसदी स्कूल न जाने वाले अधिकांश बच्चे प्रवासी कामगारों के बताए जा रहे हैं। देश में कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जहां सात फीसदी से अधिक बच्चों ने स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रखा है। एक दशक पहले हिमाचल में 19 फीसदी से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इससे साफ है कि हिमाचल के बाशिंदे अब शिक्षा के महत्त्व को समझने लगे हैं। हाल के वर्षों में शिक्षा विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश के नौनिहाल शिक्षा के महत्त्व को समझने लगे हैं। प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक की शिक्षा सभी छात्रों को निःशुल्क में दी जा रही है। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 के लागू हो जाने से हिमाचल में स्कूल न जाने वाले 0.3 बच्चों के भी शीघ्र साक्षर होने की उम्मीद जगी है। छात्रों के पंजीकरण में हिमाचल अब त्रिपुरा और केरला से एक कदम ही पीछे रहा है। उक्त राज्यों में 99.9 फीसदी बच्चे स्कूलों में भर्ती हो चुके हैं। यानी 0.1 फीसदी बच्चे ही स्कूलों से बाहर है। इसके विपरीत मेघालय में सबसे अधिक 7.2 फीसदी बच्चों ने स्कूल नहीं देखा है। आंध्रप्रदेश में 3.3 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 2.5, आसाम में 5.0, बिहार में 3.5, छतीसगढ़ में 1.9, दमन-दियू में 0.4, गोआ में 0.4, गुजरात में 4.0, हरियाणा में 1.1, झारखंड में 3.8, कर्नाटका में 3.1, महाराष्ट्रा में 1.1, मणिपुर में 1.8, मिजोरम में 2.2, नागालेंड में 2.2, ओडिसा में 4.5, पंजाब में 1.7, राजस्थान में 5.8, सिक्किम में 1.9, तमिलनाडू में 1.0, त्रिपुरा में 1.8, उत्तरप्रदेश में 5.2, उत्तराखंड में 1.7 फीसदी तथा पश्चिम बंगाल में 4.6 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। शत-प्रतिशत साक्षरता को कभीं एजुकेशन गारंटी स्कीम सेंटर, कभीं अल्टरनेटिव इनोवेटिव सेंटर और अब गैर-आवासीय ब्रिज कोर्स आरंभ (एनआरबीसी) किए जा रहे हैं।


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