स्मार्ट क्लासें

शिमला जिले के अस्सी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में स्मार्ट क्लासें तो बन गई है, लेकिन अभी तक इक्का दुक्का स्कूलों में ही स्मार्ट क्लास में बच्चों को पढ़ाई करने का मौका मिला है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों को स्मार्ट क्लास के दर्शन तक नहीं हो पाए हैं। हां, कागजों में जरूर इन कक्षाओं को चलता हुआ दिखाया जा रहा है। लिहाजा, अब शिक्षा विभाग ने स्मार्ट कक्षाओं को टाइम टेबल में दर्शाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही कक्षाओं का रजिस्टर अलग बनाने के लिए कहा है। औचक निरीक्षण के दौरान रजिस्टर चैक होंगे। नियम के मुताबिक कक्षाएं न लगाने वाले अध्यापकों पर कार्रवाई होगी।  जुलाई 2011 में आईसीटी (इनफोरमेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) के तहत स्मार्ट क्लास कंसेप्ट लागू हुआ। शिक्षा विभाग के रिकार्ड के मुताबिक जिला शिमला में कुल 117 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास प्रस्तावित की गई। अब तक अस्सी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं तैयार हो चुकी हैं। एलसीडी, प्रोजेक्टर और पाठ्यक्रम से संबंधित सोलह सीडी का सेट इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों को मुहैया करवाए जा चुके हैं। तमाम अधोसरंचना मुहैया करवाई जा चुकी हैं। बावजूद इसके मौजूदा वक्त में स्मार्ट क्लास रूम प्रोजेक्ट छात्रों के लिए कारगार साबित नहीं हो पा रहे हैं।  उधर, शिक्षा उपनिदेशक बलदेव कुमार भारद्वाज का कहना है कि इस संबंध में संबंधित स्कूल प्रधानाचार्यों को सूचित किया जा चुका है। स्कूल के टाइम टेबल में स्मार्ट क्लास दर्शानी होगी। कक्षा का रजिस्टर रखना भी लाजमी है। जिसमें तमाम ब्यौरा मौजूद होना चाहिए। किसी भी समय स्मार्ट क्लास की गतिविधियों का निरीक्षण किया जा सकता है।

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