प्लस टू परीक्षा

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की प्लस टू करने के इच्छुक व्यक्ति को अब प्लस वन की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करनी पड़ेगी। भविष्य में अगर कोई भी प्लस टू करना चाहता है, तो दसवीं के बाद दो साल का अंतर होने की स्थिति में सीधे अगली परीक्षा में बैठ सकता है। यह परीक्षा प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर ही दी जा सकेगी। इससे सरकारी सेवा में काम करने वाले उन कर्मचारियों को भी लाभ होगा, जो दसवीं कक्षा तक पढ़े हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की तरफ से मार्च, 2011 में ली गई प्लस वन की परीक्षा में 30 हजार छात्र फेल हुए थे। ऐसे में इनको दोबारा प्लस वन में बैठने की बजाए प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर परीक्षा में बैठने का मौका होगा। इसके अलावा जो छात्र अब तक प्लस वन की बाधा को पार नहीं कर पाए थे, अब सीधे तौर पर प्लस टू की परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। कर्मचारियों को भी मौका: सरकारी विभागों में कार्यरत ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इससे लाभ होगा, जिन्होंने सिर्फ दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उल्लेखनीय है कि अब प्रदेश में प्लस टू पास चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही क्लर्क बन सकते हैं। इस तरह अब कर्मचारी भी प्राइवेट छात्रों के साथ प्लस टू की परीक्षा में बैठ सकते हैं। शिक्षा सचिव की तरफ से इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के सचिव व उच्च शिक्षा विभाग के सभी उप निदेशकों को जारी कर दिए गए हैं। इन आदेशों में कहा गया है कि जो छात्र मार्च, 2011 में प्लस वन की परीक्षा में फेल हुए थे, अब प्लस टू करने के पात्र होंगे। प्लस टू की आगामी वार्षिक परीक्षा मार्च, 2012 में होगी। आदेशों में यह भी कहा गया है कि प्लस टू की परीक्षा हर साल मार्च माह में होगी। प्लस वन फेल छात्र अब सीधे प्लस टू कर सकते हैं। यह ओपन स्कूलिंग सिस्टम होगा, जिसके तहत दसवीं कक्षा के बाद दो साल का गैप होने पर प्लस टू की परीक्षा में बैठा जा सकेगा। इससे दसवीं पास व्यक्ति उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित होंगे। 

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