मैं हूँ एक रमता जोगी -- चमन प्रकाश


Chaman Prakash

 






मैं हूँ एक रमता जोगी
भेद न जाने कोई
कोई अगर समझना चाहे
समझ न पाए कोई
मैं हूँ एक रमता जोगी .....................!
रात के पहर में .........
एक दिन सपनो में ,
एक बच्चा भोलेपन से बोला ,
मैं पदना चाहता हूँ ,
पर स्कूल नहीं भिजवाता कोई ,
आप बताओ मैं क्या करूँ ?
मुझे स्कूल नहीं क्यों ले जाता कोई ?
मैं था निरुतर, एक टक निहारता ,
सोचता, समझता और संभलता,
फिर बच्चा बोला ,
मेरी कमी बताओ.........
क्या मेरे हाथ नहीं .....
पैर नहीं या मुख नहीं ....
क्या नहीं मुझ में ?
मेरी तरफ फिर इशारा करके ...
क्या तुम नहीं मेरे जैसे .....
मैं अवाक ......... अनसुलझा ....... निहारता हुआ....
निरुतर सा निहारता रहा.......
कोशिश तमाम थी .....
के मैं उत्तर दूं ...
पर कहूं क्या............
मैं निरुतर था.....
बच्चा कहता हुआ चला गया.....
मैं हूँ एक रमता जोगी............




साभार 

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