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अभिनन्दनीय है-अभिनन्दन ग्रन्थ -- आचार्य ओमप्रकाश 'राही'

अनेक पत्र-पत्रिकाओं तथा पुस्तकों का सम्पादन कर चुके उच्च कोटि के साहित्यकार डा.प्रेमलाल गौतम के सम्पादन में बहुमुखी प्रतिभा के धनी तथा बहुआयामी व्यक्तित्व विभूषित ज्योतिर्विद् एवं समाजसेवी श्रीयुत स्वाधीन चन्द्र गौड के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को लेकर तैयार किये गये 'अभिनन्दन ग्रन्थ' की प्रति हस्तगत हुई तो एक दूरदर्शी तथा गम्भीर मुद्रा में 'अभिनन्दनीय' के प्रभावी चित्र से विभूषित मुखपृष्ठ ने बेहद प्रभावित किया ।
      सूक्ष्मेक्षिकया देखने पर जहाँ प्रथम अध्याय में वैदुष्य पूर्ण सम्पादकीय के साथ स्वामी दीनबन्धु दास, प्रो.मनसाराम अरुण, प्रवीणचन्द्र गौड,लक्ष्मण प्रसाद शर्मा आदि के 'आशीर्वचन' एवं साहित्यकार डा.मुरलीधर पाण्डेय तथा प्रो.दिनेश चमोला शैलेश जैसे विद्वानों की 'शुभाशंसा' से मन गदगद हो जाता है वहीं दूसरे अध्याय में राष्ट्रपति सम्मानित अभिनवकालिदास महामहोपाध्याय प्रो.केशवराम शर्मा का 'अभिनन्दनम्' संस्कृत आशुकवि डा.मनोहरलाल आर्य का 'श्री स्वाधीनचन्द्र गौडो विजयताम्' तथा हिमाचल संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव डा. हरिदत्त शर्मा का 'पुण्यात्मकं पालय' संस्कृत पद्यावली में किया गया चित्रण बेहद प्रभावशाली है ।
        पूर्व प्राचार्य डा. रामदत्त शर्मा ने अपने आलेख में गौड साहिब की श्रेष्ठ एवं प्रभावी वक्तृता को उनके प्रवचनों से ही सोदाहरण प्रस्तुत किया है । हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी के पूर्व सचिव डा. जगदीश शर्मा ने गौड साहिब की दिव्य दृष्टि का स्वानुभूत तथ्यों के आधार पर प्रदर्शन किया है जो वास्तव में आश्चर्यजनक है । के. सी. वालिया ने अपने आलेख में सप्रमाण प्रतिपादित किया है कि गौड जी सच्चे अर्थों में 'विलक्षण प्रतिभा के धनी' रहे हैं जबकि पूजा ढिल्लों ने 'मेरे पथ प्रदर्शक श्रद्धेय गुरुदेव' मानकर अपनी हर समस्या का निवारक सिद्ध किया है । वृजभूषण शर्मा ने भी स्मृतियों को साझा करते हुए गौड साहिब के अलौकिक गुणों का वर्णन किया है जबकि शारदा देवी की गुरु के प्रति श्रद्धा व कृतज्ञता भी पठनीय एवं मननीय है और अजय मेहता (पृष्ठ 82) द्वारा गुरु शीश के साथ 'दिव्य प्रकाश' के दर्शन करना गौड जी की दिव्यता दर्शाता है ।
   उपनिषदों, पुराणों तथा नीति ग्रन्थों से उद्धरण पूर्वक पूर्व प्राचार्य डा. केशवानंद कौशल ने गौड साहिब की जीवनशैली व कार्य प्रणाली से प्रभावित होकर मननीय प्रश्न उपस्थापित किया है "---निजहृदि विकसन्त:सन्ति सन्त: कियन्त:" ? पूर्व जिला भाषा अधिकारी सीताराम ठाकुर ने 'विराट व्यक्तित्व के धनी : श्रीयुत स्वाधीनचन्द्र गौड' के अथक प्रयासों की चर्चा करते हुए जिस तरह 1998 से प्रारम्भ हुई 'कल्याणी' पत्रिका के सभी नौ अंकों में प्रकाशित 'मुख्य संरक्षक की कलम से' निकले शब्दों तथा उनके आलेखों का परिचय दिया है उससे पत्रिका की उपादेयता भी स्वयं सिद्ध हो रही है ।
               इसी क्रम में गौड जी को विभिन्न लेखकों की विचारधाराओं को इस 'अभिनन्दन ग्रन्थ' में संकलित किया गया है । ऋषिपाल शर्मा इन्हें 'अभिन्न मित्र और सहपाठी' मानते हैं तो गिरीश दीक्षित 'आदर्श शिक्षक'। नवनीत शर्मा को ये 'महामानव' नजर आते हैं जबकि सुचेता शर्मा को 'युगपुरुष' । गावर सिंह नेगी इन्हें अपना 'प्रेरणास्रोत' मानते हैं और अमरदेव आंगिरस 'सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षक' ।अजय मेहता ने इन्हें 'सद्गुरुदेव' कहा है  जबकि पवन गुप्ता ने 'महान् वटवृक्ष की दुर्लभ छाया' । रीता कपूर इन्हें 'जीवन आदर्श' मानती हैं और सुनील कुमार मिश्र 'एक आकर्षक व्यक्तित्व' । भीमसिंह चौहान इन्हें 'शालीनता की प्रतिमूर्ति' बताते हैं तथा योगराज जोग 'सनातन धर्म का सच्चा सिपाही' ।
      पश्चिम मुम्बई से पटकथा लेखक निम्मी एवं वागीश धमीजा की 'गुरु महिमा अपरम्पार' के ये शब्द बहुत प्रभावशाली जान पड़ते हैं :---- "इस जन्म में तो कोई ऐसा कार्य याद नहीं आता,मगर पिछले जन्म में जरूर कोई अच्छा कर्म रहा होगा जिससे स्वाधीनचन्द्र गौड जैसे सच्चे गुरु से मिलना सम्भव हो पाया"। 
       राजस्थान से डा.उर्मि माली के छन्दोबद्ध 65 पद्यों में  जहाँ 'धन्या सनातन सभा रबौण' पठनीय एवं मननीय है वहीं नीलम चौहान की 'महामानव' डा.मस्तराम शर्मा की 'सनातन का महावृक्ष' के.सी.वालिया की 'क्या गजब हो तुम' सुरेश शर्मा की 'गुरुदेव' तथा योगेन्द्र शर्मा की 'मन्दिर स्थापना दिवस' कविताएँ भी प्रभावशाली बन पड़ी हैं ।
      पोर्टलैंड, अमेरिका से डा.हर्षिता ढिल्लों के THE REFLECTION OF GOD उच्च न्यायालय शिमला के अधिवक्ता जनेश्वर के OUR GUIDING LIGHT भरत बी कक्कड़ के RESPECTED GAYR JI तथा राजीव शांडिल के GAUR SAHIB विचार भी गहनता से गौड साहिब के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं ।
         इन सबके साथ गौड साहिब के 'वंशवृक्ष' की पाँच पीढियों का समग्रता से चित्रण करते सम्पादकीय दायित्व को बखूबी निभाते डा.प्रेमलाल गौतम के 50 पृष्ठीय आलेख या कहें लघु पुस्तक में 'समाजसेवी ज्योतिर्विद् श्रीयुत स्वाधीनचन्द्र गौड का समग्र व्यक्तित्व एवं कृतित्व' पाठकों को गौड साहिब के अध्ययन-अध्यापन, जीवन संघर्ष,जप-तप,आराधना-साधना और ऋद्धि-सिद्धि के साथ उनके साथ हुई चमत्कार पूर्ण घटनाओं का वर्णन उनके समूचे जीवन से बखूबी परिचित कराता है और सचमुच किसी महामानव से मिलने का अहसास कराता है ।
      एतदनन्तर स्कन्द पुराण के अन्तर्गत आने वाली  'श्रीगुरुगीता' का संकलन भी सामयिक एवं प्रासंगिक बन पड़ा है ।
     तृतीय अध्याय में 'पुस्तक एवं पत्र-पत्रिकाओं के गवाक्ष से' कुछ देखने का अवसर प्राप्त होता है जबकि चतुर्थ अध्याय 'गौड' साहब की 'प्रशस्ति एवं सम्मान' से भरा पड़ा है । हमें इस बात की प्रसन्नता है कि हमारी संस्था 'हि.प्र.सिरमौर कला संगम' भी माननीय गौड साहब को 2017 में अपने राष्ट्र स्तरीय अलंकरण समारोह में अलंकृत करने का अवसर प्राप्त कर चुकी है जिसका प्रशस्ति पत्र भी यहाँ संकलित है । पंचम एवं अंतिम अध्याय मुँह बोलती तस्वीरों की 'चित्रावली' से सुसज्जित है ।
          नि:संदेह 272 पृष्ठों के विस्तृत फलक पर आस्तीर्ण इस अभिनन्दनीय 'अभिनन्दन ग्रन्थ' को प्रस्तुत करने के लिए सम्पादक डा.प्रेमलाल गौतम के साथ 'शिष्य मण्डल, गुरुकुल ब्रजधाम, रबौण,सोलन' बधाई का पात्र है । अभिनन्दन अभिनन्दन अभिनन्दन